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Rajya Sabha
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राज्य सभा में पूछे जाने वाले प्रश्नों और उनके उत्तरों की ग्राह्यता

  • राज्य सभा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के संबंध में सदस्यों द्वारा दी गई सूचना की ग्राह्यता राज्य सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन विषयक नियमों के नियम 47-50 द्वारा शासित होती है।
  • नियम 47 के अनुसार, प्रश्न की ग्राह्यता की शर्तें निम्नलिखित हैं:
  •  
  1. वह सटीक, विशिष्ट और केवल एक मुद्दे के लिए सीमित होगा;
  2. उसमें कोई ऐसा नाम या कथन नहीं होगा जो प्रश्न को सुबोध बनाने के लिये सर्वथा आवश्यक न हो;
  3. यदि उसमें कोई कथन हो तो सदस्य को उस कथन की परिशुद्धता के लिये उत्तरदायी होना पड़ेगा;
  4. उसमें तर्क, अनुमान, व्यंग्यात्मक पद, अभ्यारोप, विशेषण या मानहानिकारक कथन नहीं होंगे;
  5. उसमें राय प्रकट करने या किसी अमूर्त विधि संबंधी प्रश्न या किसी काल्पनिक प्रस्थापना के समाधान के लिए नहीं पूछा जायेगा;
  6. उसमें किसी व्यक्ति की पदेन या सार्वजनिक हैसियत के अतिरिक्त उसके चरित्र या आचरण के बारे में नहीं पूछा जायेगा;
  7. उसमें 100 से अधिक शब्द नहीं होंगे;
  8. वह किसी ऐसे विषय से संबंधित नहीं होगा जो मुख्यतया भारत सरकार का विषय न हो;
  9. उसमें सामान्यत: ऐसे विषयों के बारे में जानकारी नहीं मांगी जाएगी जो किसी संसदीय समिति के समक्ष विचाराधीन हों;
  10. उसमें किसी संसदीय समिति की ऐसी कार्यवाही के बारे में नहीं पूछा जायगा जो उस समिति के प्रतिवेदन द्वारा राज्य सभा के सामने न रखी गई हो;
  11. उसमें किसी ऐसे व्यक्ति के चरित्र या आचरण पर अभ्युक्ति नहीं की जायेगी जिसके आचरण पर केवल मूल प्रस्ताव के द्वारा ही आपत्ति की जा सकती हो;
  12. उसमें व्यक्तिगत रूप का दोषारोपण नहीं किया जायेगा और न वह दोषारोपण ध्वनित होगा;
  13. उसमें नीति संबंधी ऐसे प्रश्न नहीं उठाये जायेंगे जो इतने विस्तीर्ण हों कि प्रश्न के उत्तर की सीमा के भीतर न आ सकें;
  14.  उसमें ऐसे प्रश्नों की सारत: पुनरुक्ति नहीं होगी जिनके उत्तर पहले दिये जा चुके हों या जिनका उत्तर देना अस्वीकार कर दिया गया हो;
  15. उसमें नगण्य विषयों पर जानकारी नहीं मांगी जाएगी;
  16. उसमें साधारणतया विगत इतिहास के विषयों पर जानकारी नहीं मांगी जायेगी;
  17.   उसमें ऐसी जानकारी नहीं मांगी जायेगी जो सुलभ प्रलेखों या साधारण संदर्भ कृतियों में दी गई हो;
  18.  उसमें ऐसे विषय नहीं उठाये जायेंगे जो ऐसे निकायों या व्यक्तियों के नियंत्रण में हों जो मुख्यतया भारत सरकार के प्रति उत्तरदायी न हों;
  19.   उसमें किसी ऐसे विषय के संबंध में जानकारी नहीं मांगी जाएगी जो भारत के किसी भाग में क्षेत्राधिकार रखने वाले किसी न्यायालय के न्यायनिर्णयाधीन हो;
  20.  उसका किसी ऐसे विषय से संबंध नहीं होगा जिससे मंत्री पदेन संबंधित न हो;
  21.   उसमें किसी मित्र देश के प्रति अशिष्ट निर्देश नहीं होगा; और
  22.   उसमें ऐसे विषयों के संबंध में जानकारी नहीं मांगी जायेगी जो गोपनीय प्रकार के हों।
  • नियम 48 के अनुसार जिन विषयों पर भारत सरकार और किसी राज्य सरकार के बीच पत्र-व्यवहार हो रहा हो या हो चुका हो, उनके बारे में तथ्यात्मक विषयों को छोड़कर कोई प्रश्न नहीं पूछा जायेगा और उत्तर तथ्य कथन तक ही सीमित होगा।
  • ऐसे मामले, जो राज्यों के अनन्य क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत आते हैं और जिनके लिए राज्य सरकार उत्तरदायी होती है, से संबंधित जानकारी मांगने वाले प्रश्नों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। तथापि, जब कोई राज्य राष्ट्रपति शासनाधीन होता है, तो उस राज्य के क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत आने वाले मामलों से संबंधित सभी प्रश्नों को स्वीकार किया जाएगा।
  • सामान्यत: निम्नलिखित प्रकार के प्रश्न लिखित उत्तर अर्थात् अतारांकित प्रश्नों के रूप में स्वीकार्य किए जाते हैं:
  1. सांख्यिकीय स्वरूप की सूचना से संबंधित प्रश्न;
  2. विस्तृत सूचना से संबंधित प्रश्न;
  3. स्थानीय हित के मामले उठाने से संबंधित प्रश्न;
  4. विभागों के सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की संख्या और संविधान के अन्तर्गत संरक्षित समुदायों के सेवा में प्रतिनिधित्व से संबंधित प्रश्न;
  5. प्रथम दृष्टया अनुपूरक प्रश्नों की संभावना रहित प्रश्न;
  6. सभा पटल पर विवरण रखे जाने की मांग करने वाले प्रश्न; और
  7. केवल सीमित वर्ग के लोगों के हितों से संबंधित प्रश्न।

हालांकि, ये अतारंकित प्रश्न के रूप में स्वीकार किए जा सकने वाले प्रश्नों की श्रेणी के उदाहरण मात्र हैं। तथापि, प्रत्येक प्रश्न पर उसके गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाता है।