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Rajya Sabha
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नियमों का संशोधन

216. नियम समिति
राज्य सभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन के विषयों पर विचार करने और इन नियमों में ऐसे संशोधन अथवा वृद्धियों की सिफारिश करने के लिये, जो आवश्यक समझी जायें एक नियम समिति का गठन किया जायेगा।
217. गठन
(1) नियम समिति सभापति द्वारा नाम-निर्देशित की जायेगी और उसमें सभापति तथा उपसभापति सहित सोलह सदस्य होंगे।
(2) सभापति समिति का अध्यक्ष होगा।
(3) उप-नियम (1) के अधीन नाम-निर्देशित समिति नई समिति के नाम-निर्देशित होने तक कार्य करती रहेगी।
(4) समिति में आकस्मिक रूप से रिक्त स्थान सभापति द्वारा भरे जायेंगे।
(5) यदि सभापति किसी कारण से समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने में असमर्थ हो तो उपसभापति उसके स्थान पर समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा।
(6) यदि सभापति अथवा, उपसभापति यथास्थिति, किसी कारण से किसी बैठक का सभापतित्व करने में असमर्थ हो, तो समिति उस बैठक के लिए अध्यक्ष के रूप में कार्य करने हेतु किसी अन्य सदस्य को चुनेगी।
218. गणपूर्ति
(1) समिति की बैठक के लिये गणपूर्ति सात से होगी।
(2) समिति का अध्यक्ष प्रथमत:, मत नहीं देगा, किन्तु किसी विषय पर मतों की संख्या समान होने की अवस्था में उसका निर्णायक मत होगा और वह उसका प्रयोग करेगा।
219. प्रतिवेदन का उपस्थापन
समिति का प्रतिवेदन, जिसमें उसकी सिफारिशें अन्तर्विष्ट होंगी, उपसभापति अथवा उसकी अनुपस्थिति में समिति के किसी सदस्य द्वारा राज्य सभा में प्रस्तुत किया जायेगा।
220. प्रतिवेदन पर विचार
(1) प्रतिवेदन के प्रस्तुत किए जाने के बाद, यथाशीघ्र, उपसभापति अथवा उसकी अनुपस्थिति में सभापति द्वारा नामोद्दिष्ट समिति का कोई सदस्य यह प्रस्ताव कर सकेगा कि समिति के प्रतिवेदन पर विचार किया जाये।
(2) कोई सदस्य प्रतिवेदन पर विचार करने के प्रस्ताव में संशोधन की सूचना उस रूप में दे सकेगा, जैसे सभापति उपयुक्त समळो।
(3) प्रतिवेदन पर विचार करने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने के बाद, उपसभापति अथवा उसकी अनुपस्थिति में सभापति द्वारा नामोद्दिष्ट समिति का कोई सदस्य प्रस्ताव कर सकेगा कि राज्य सभा प्रतिवेदन में अन्तर्विष्ट सिफारिशों से सहमत है, अथवा संशोधन सहित सहमत है।
(4) नियमों के संशोधन जिस रूप में वे राज्य सभा द्वारा अनुमोदित हों, सभापति द्वारा नियत तिथि से प्रभावी होंगे।