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Rajya Sabha
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कार्य का विन्यास

23.   सरकारी कार्य का विन्यास
सरकारी कार्य के सम्पादन के लिए नियत किए गए दिनों में ऐसे कार्य को पूर्ववर्तिता प्राप्त होगी और महासचिव उस कार्य का विन्यास ऐसे क्रम में करेगा जिसे कि सभापति राज्य सभा के नेता से परामर्श करने के बाद निर्धारित करे :
 परन्तु जिस दिन वह कार्य निबटारे के लिए रखा गया हो उस दिन कार्य के ऐसे क्रम में तब तक परिवर्तन नहीं किया जायेगा जब तक सभापति का समाधान न हो जाये कि ऐसे परिवर्तन के लिए पर्याप्त आधार है।
24.   गैर-सरकारी सदस्यों के कार्य के लिए समय का नियतन
जब तक सभापति अन्यथा निदेश न दे, शुक्रवार की किसी बैठक का ढाई घंटे से अन्यून समय गैर-सरकारी सदस्यों के कार्य के निष्पादन के लिए नियत किया जायेगा :
परन्तु सभापति ऐसे कार्य के भिन्न-भिन्न वर्गों के निबटारे के लिए भिन्न-भिन्न शुक्रवार नियत कर सकेगा और कार्य के किसी वर्ग के विशेष के लिए इस प्रकार नियत शुक्रवार को उस वर्ग के कार्य को पूर्ववर्तिता प्राप्त होगी  
 परन्तु यह और भी कि सभापति राज्य सभा के नेता के परामर्श से गैर-सरकारी सदस्यों के कार्य के निष्पादन के लिए शुक्रवार के अतिरिक्त कोई और दिन नियत कर सकेगा :
 परन्तु यह और भी कि यदि किसी शुक्रवार को सभा की बैठक न हो तो सभापति यह निदेश दे सकेगा कि गैर-सरकारी सदस्यों के कार्य के निष्पादन के लिए उसी सप्ताह में किसी अन्य दिन की बैठक में ढाई घंटे से अन्यून नियत किये जायें :
25.   गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों की पूर्ववर्तिता
(1) गैर-सरकारी सदस्यों द्वारा दी गई विधेयकों की सूचनाओं की सापेक्ष पूर्ववर्तिता सभापति द्वारा दिये गये आदेशों के अनुसार लाटरी द्वारा उस दिन निर्धारित की जायेगी, जिसका कि सभापति निदेश दें, परन्तु जो उस दिन से कम से कम पन्द्रह दिन पूर्व होगा जिसके संबंध में लाटरी होगी।
(2) गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों को निबटाने के लिए नियत किये गये दिन ऐसे विधेयकों को निम्नलिखित क्रम में सापेक्ष पूर्ववर्तिता प्राप्त होगी, अर्थात्:-
( क ) वे विधेयक जिनके संबंध में प्रस्ताव यह है कि विधेयक को पुर:स्थापित करने की अनुमति दी जाये  
( ख ) वे विधेयक जो राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 111 के अधीन संदेश के साथ लौटाये गये हों  
( ग ) वे विधेयक जो राज्य सभा द्वारा पारित किये गये हों तथा लोक सभा द्वारा संशोधनों सहित लौटाये गये हों  
( घ ) वे विधेयक जो लोक सभा द्वारा पारित किये गये तथा राज्य सभा को पहुंचाये गये हों  
( ङ ) वे विधेयक जिनके संबंध में यह प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका हो कि विधेयक पर विचार किया जाये  
( च ) वे विधेयक जिनके संबंध में किसी संयुक्त या प्रवर समिति को कोई प्रतिवेदन उपस्थित किया जा चुका हो  
( छ ) वे विधेयक जो उन पर राय जानने के लिए परिचालित किये गये हों  
( ज ) वे विधेयक जो पुर:स्थापित किये गये हों और जिनके संबंध में कोई और प्रस्ताव न किया गया हो या स्वीकृत न हुआ हो  
(झ) अन्य विधेयक ।
(3) उपनियम (2) के एक ही खंड के अधीन आने वाले विधेयकों को सापेक्ष पूर्ववर्तिता लाटरी द्वारा ऐसे समय तथा ऐसी रीति से जिसका कि सभा निदेश दे, निर्धारित की जायेगी  
परन्तु यह कि उप-नियम (2) के खंड (ज) के अधीन आने वाले विधेयकों की सापेक्ष पूर्ववर्तिता का निर्धारण करने के लिए भार साधक सदस्यों के नाम लाटरी द्वारा निकाले जायेंगे और लाटरी में प्रथम दस स्थान प्राप्त करने वाले सदस्यों के विधेयकों को गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों के निबटाने के लिए नियत किसी दिवस की कार्यावलि में सम्मिलित किया जायेगा :

परन्तु यह और कि यदि किसी सदस्य के नाम में एक से अधिक विधेयक लंबित हों, तो वह अपने विधेयकों में से एक ही विधेयक का चयन करने के लिए पात्र नहीं होगा :
 परन्तु यह और भी कि कोई भी सदस्य उसी सत्र में नियम (2) के खंड ( ज ) के अधीन आने वाले एक से अधिक विधेयक के संबंध में कोई प्रस्ताव उपस्थित करने के लिए पात्र नहीं होगा।
(4) सभापति विशेष आदेश द्वारा, जो राज्य सभा में घोषित किया जायेगा, उपनियम (2) में दिये हुए, विधेयकों की सापेक्ष पूर्ववर्तिता में ऐसे परिवर्तन कर सकेगा जो आवश्यक या सुविधाजनक समझे।
26. गैर-सरकारी सदस्यों द्वारा संकल्पों की पूर्ववर्तिता
गैर-सरकारी सदस्यों द्वारा संकल्प उपस्थित करने के आशय से दी गयी सूचनाओं की सापेक्ष पूर्ववर्तिता सभापति द्वारा दिये गये आदेशों के अनुसार लाटरी द्वारा उस दिन निर्धारित की जाएगी जिसका कि सभापति निदेश दे।
27. दिन के अंत में अवशिष्ट कार्य
गैर-सरकारी सदस्यों का वह कार्य जो उस वर्ग के कार्य के लिए नियत किये गये दिन के लिए रखा गया हो और उस दिन न लिया गया हो, किसी बाद के दिन के लिये तब तक नहीं रखा जायेगा जब तक उसे उस दिन के संबंध में निकाली गई लाटरी में पूर्ववर्तिता प्राप्त न हो गई हो:
परन्तु नियम 25 तथा 26 में किसी बात के अन्तर्विष्ट होते हुए भी ऐसा कोई कार्य जो उस दिन के अन्त में चर्चाधीन हो, उस वर्ग के कार्य के लिये नियत अगले दिन के लिये रख दिया जायेगा और उस दिन के लिए रखे गये अन्य सब कार्यों पर पूर्ववर्तिता प्राप्त होगी।
28. गैर-सरकारी सदस्य के विधेयक या संकल्प पर स्थगित वाद-विवाद का पुनरारम्भ
( 1 ) जब किसी प्रस्ताव के स्वीकृत हो जाने पर किसी गैर-सरकारी सदस्य के विधेयक या संकल्प पर वाद-विवाद उसी या अगले सत्र में गैर-सरकारी सदस्यों के कार्य के लिए नियत किए गये अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया जाए तो उसे आगे चर्चा के लिए तब तक नहीं रखा जायेगा जब तक कि उसे लाटरी में पूर्ववर्तिता प्राप्त न हो गई हो।
( 2 ) जब गैर-सरकारी सदस्य के विधेयक या संकल्प पर वाद-विवाद अनिश्चित काल तक के लिये स्थगित कर दिया जाये तो, यथास्थिति, विधेयक का भार साधक सदस्य या संकल्प का प्रस्तावक, यदि वह गैर-सरकारी सदस्यों के कार्य के लिये नियत किसी बाद के दिन ऐसे विधेयक या संकल्प पर चर्चा जारी रखना चाहता हो, स्थगित वाद-विवाद को पुन: आरम्भ करने के लिए सूचना दे सकेगा और ऐसी सूचना मिलने पर किसी ऐसे विधेयक या संकल्प को, जैसी भी स्थिति हो, उस दिन के लिये रखे गये अन्य विधेयकों या संकल्पों से पूर्ववर्तिता प्राप्त होगी।
29. कार्यावलि
( 1 ) महासचिव प्रत्येक दिन के लिए एक कार्यावलि तैयार करेगा और उसकी एक-एक प्रति प्रत्येक सदस्य के उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जायेगी।
( 2 ) इन नियमों में अन्यथा उपबन्धित अवस्था को छोड़ कर सभापति की अनुमति के बिना किसी बैठक में ऐसा कोई कार्य नहीं किया जायेगा जो उस दिन की कार्यावलि में सम्मिलित न हो।
(3) इन नियमों में अन्यथा उपबन्धित अवस्था को छोड़ कर, कोई ऐसा कार्य जिसके लिए सूचना अपेक्षित हो उस कार्य के वर्ग के लिए अपेक्षित सूचना की कालावधि समाप्त होने के बाद वाले दिन से पूर्व किसी दिन के लिए नहीं रखा जायेगा।

(4) जब तक सभापति अन्यथा निदेश न दे, गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों या संकल्पों की जैसी भी स्थिति हो निबटाने के लिए नियत किसी दिन की कार्यावलि में, नियम 25 के उपनियम (2) के खंड ( ज ) के अधीन आने वाले दस विधेयकों या पांच संकल्पों झ्र् नियम 27 के परन्तु या नियम 28 के उप-नियम (2) के अधीन आने वाले किसी विधेयक या संकल्प के अतिरिक्त ट से अधिक विधेयक या संकल्प नहीं रखे जायेंगे।
30. कार्य-मंत्रणा समिति का गठन
 (1) सभापति समय-समय पर, कार्य मंत्रणा समिति नामक एक समिति नाम-निर्देशित कर सकेगा जिसमें सभापति तथा उपसभापति को मिला कर ग्यारह सदस्य होंगे।
(2) सभापति समिति का अध्यक्ष होगा।
(3) उप-नियम (1) के अधीन नाम-निर्देशित की गई समिति तब तक कार्य करती रहेगी जब तक कि एक नई समिति नाम-निर्देशित न की जाये।
(4) यदि सभापति किसी कारण से समिति की किसी बैठक का सभापतित्व करने में असमर्थ हो तो उपसभापति उस बैठक के अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा।
(5) यदि सभापति अथवा उपसभापति, यथास्थिति, किसी कारण से किसी बैठक का सभापतित्व करने में असमर्थ हों तो समिति अपनी उस बैठक के लिए अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए किसी अन्य सदस्य हो चुनेगी।
31. आकस्मिक रूप से रिक्त हुए स्थानों का भरा जाना
समिति में आकस्मिक रूप से रिक्त हुए स्थानों को सभापति भरेगा।
32. गणपूर्ति
समिति की गणपूर्ति पांच से होगी।
33. कृत्य
(1) समिति का यह कृत्य होगा कि वह -
( क ) ऐसे सरकारी विधेयकों के प्रकम या प्रकमों तथा अन्य कार्य पर जिन्हें सभापति राज्य सभा के नेता के परामर्श से समिति को सौंपे जाने का निदेश दें, चर्चा के लिए  और
( ख ) गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा संकल्पों के प्रकम या प्रक्रमों पर चर्चा के लिए समय के नियतन की सिफारिश करे।
(2) समिति को प्रस्थापित समय के नियतन में यह दर्शाने की शक्ति होगी कि विधेयक के विभिन्न प्रक्रम तथा अन्य कार्य किस-किस समय पूरे होंगे।
(3) समिति ऐसे अन्य कृत्य करेगी जो सभापति द्वारा समय-समय पर उसे सौंपे जाएं।
34. राज्य सभा को समय के नियतन की सूचना
विधेयक या विधेयकों के समूह अथवा अन्य कार्य के बारे में समिति द्वारा अनुशंसित समय का नियतन सभापति अथवा, उनकी अनुपस्थिति में, उपसभापति द्वारा राज्य सभा को सूचित कर दिया जायेगा और संसदीय समाचार में अधिसूचित किया जाएगा।

35. समय के नियतन का आदेश
राज्य सभा को सूचित किये जाने के बाद यथाशीघ्र उपसभापति द्वारा अथवा उनकी अनुपस्थिति में राज्य सभा के सभापति द्वारा नामोद्दिष्ट समिति के किसी अन्य सदस्य द्वारा यह प्रस्ताव उपस्थित किया जा सकेगा कि वह राज्य सभा, यथास्थिति अमुक-अमुक विधेयक या विधेयकों, अथवा अन्य कार्यों के बारे में समिति द्वारा प्रस्थापित समय के नियतन से सहमत हैं, और यदि ऐसा प्रस्ताव राज्य सभा द्वारा स्वीकार कर लिया जाये तो वह इस प्रकार से प्रभावी होगा, जैसे कि वह सभा का आदेश हो:
परन्तु यह संशोधन उपस्थित किया जा सकेगा कि प्रतिवेदन या तो बिना परिसीमा के अथवा किसी विशेष विषय के संबंध में समिति को पुन: सौंपा जाये:
परन्तु यह और भी कि प्रस्ताव पर चर्चा के लिए आधे घण्टे से अधिक समय नियत नहीं किया जायेगा और कोई सदस्य ऐसे प्रस्ताव पर पांच मिनट से अधिक नहीं बोलेगा।
36. अवशिष्ट विषयों का निबटारा
सभापति विधेयक के किसी विशेष प्रक्रम या अन्य कार्य को पूरा करने के लिए समय के नियतन के आदेश के अनुसार निश्चित समय पर विधेयक के उस प्रक्रम या अन्य कार्य के संबंध में सभी अवशिष्ट विषयों को निबटाने के लिए आवश्यक प्रत्येक प्रस्ताव पर तुरन्त मत लेगा।
37. समय के नियतन के आदेश में परिवर्तन
समय के नियतन के आदेश में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा, जब तक कि सभापति ऐसा न करे, जो राज्य सभा का अभिप्राय मालूम करके यदि इस बात से सन्तुष्ट हो जाये कि ऐसे परिवर्तन के लिये सामान्य सहमति है तो वह ऐसा परिवर्तन कर सकेगा।