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Rajya Sabha
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अधीनस्थ विधान संबंधी समिति

204. अधीनस्थ विधान संबंधी समिति
अधीनस्थ विधान संबंधी समिति इस बात की परिनिरीक्षा करने और राज्य सभा को यह प्रतिवेदित करने के लिये होगी कि क्या नियमों, विनियमों, उपविधियों, योजनाओं अथवा अन्य परिनियत संलेखों को बनाने की संविधान द्वारा प्रदत्त या संसद द्वारा प्रत्यायोजित शक्तियों का प्रयोग, यथास्थिति उस परिदान या प्रत्यायोजन के अन्तर्गत उचित रूप से किया गया है।
205. गठन
(1) समिति में पन्द्रह सदस्य होंगे जो सभापति द्वारा नाम-निर्देशित किये जायेगे।
(2) उपनियम (1) के अधीन नाम-निर्देशित समिति कोई नई समिति नाम-निर्देशित होने तक कार्य करती रहेगी।
(3) समिति में आकस्मिक रूप से रिक्त हुए स्थानों की पूर्ति सभापति द्वारा की जायेगी।
206. समिति का अध्यक्ष
(1) समिति का अध्यक्ष समिति के सदस्यों में से सभापति द्वारा नियुक्त किया जायेगा :
परन्तु यदि उप सभापति समिति का सदस्य हो तो उसे समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया जायेगा।
(2) यदि समिति का अध्यक्ष किसी कारण से कार्य करने में असमर्थ हो तो सभापति उसी प्रकार से उसके स्थान पर समिति का एक अन्य अध्यक्ष नियुक्त कर सकेगा।
(3) यदि समिति का अध्यक्ष किसी बैठक से अनुपस्थित रहे तो समिति किसी अन्य सदस्य को उस बैठक में समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिये चुनेगी।
207. गणपूर्ति
(1) समिति की बैठक के लिये गणपूर्ति पांच से होगी।
(2) समिति का अध्यक्ष प्रथमत: मत नहीं देगा परन्तु किसी विषय पर मतों की संख्या समान होने की अवस्था में उसका निर्णायक मत होगा और वह उसका प्रयोग करेगा।
208. साक्ष्य लेने अथवा पत्र, अभिलेख अथवा प्रलेख मांगने की शक्ति
(1) यदि समिति अपने कर्त्तव्य -पालन के लिये व्यक्तियों की उपस्थिति अथवा पत्र अथवा अभिलेख प्रस्तुत कराना आवश्यक समझे तो उसे ऐसा मार्ग अपनाने की शक्ति होगी :
परन्तु सरकार किसी प्रलेख को प्रस्तुत करने से इस आधार पर इन्कार कर सकेगी कि उसका प्रकट किया जाना राज्य की सुरक्षा या हित के प्रतिकूल होगा।
(2) इस नियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए महासचिव द्वारा हस्ताक्षरित आदेश के द्वारा किसी साक्षी को आमंत्रित किया जा सकेगा और वह ऐसे प्रलेख प्रस्तुत करेगा जो समिति के उपयोग के लिए अपेक्षित हों।

209. कृत्य
संविधान के अथवा संसद् द्वारा किसी अधीनस्थ प्राधिकारी को प्रत्यायोजित वैधानिक कृत्यों के अनुसरण में बनाये गये प्रत्येक नियम, विनियम, उपविधि, योजना अथवा अन्य परिनियम, संलेख के ( जिसे इसके पश्चात् "आदेश" कहा गया है ) जिसको संसद के समक्ष रखा जाना अपेक्षित हो, राज्य सभा के समक्ष इस प्रकार रखे जाने के बाद, समिति विशेष रूप से इस बात पर विचार करेगी कि -
(1) क्या वह आदेश संविधान के उपबन्धों अथवा उस अधिनियम के अनुकूल है जिसके अनुसरण में वह बनाया गया है  
(2) क्या उस आदेश में ऐसा विषय अन्तर्विष्ट है जिसे समिति की राय में अधिक समुचित ढंग से संसद के अधिनियम के द्वारा निपटाया जाये :
(3)  क्या उस आदेश में कोई करा रोपण अंतर्विष्ट है  
(4) क्या उस आदेश में न्यायालयों के क्षेत्राधिकार में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रुकावट होती है  
(5) क्या वह आदेश उन उपबन्धों में से किसी को भूतलक्षी प्रभाव देता है जिसके
सम्बन्ध में संविधान अथवा अधिनियम स्पष्ट रूप से ऐसी कोई शक्ति प्रदान नहीं करता  
(6) क्या उस आदेश में भारत की संचित निधि या लोक राजस्व में से व्यय अन्तर्ग्रस्त है  
(7) क्या उस आदेश में संविधान अथवा उस अधिनियम द्वारा प्रदत्त शक्तियों का, जिसके अनुसरण में वह बनाया गया है, असामान्य अथवा अप्रत्याशित उपयोग किया गया प्रतीत होता है  
(8) क्या उस आदेश के प्रकाशन में या उसके संसद के समक्ष रखे जाने में अनुचित विलम्ब हुआ प्रतीत होता है  और
(9) क्या किसी कारण से आदेश के रूप या अभिप्राय के किसी विशुद्धीकरण की आवश्यकता है।
210. प्रतिवेदन
(1) यदि समिति की राय हो कि कोई आदेश पूर्णत: या अंशत: रद्द कर दिया जाना चाहिये या उसमें किसी प्रकार का संशोधन किया जाना चाहिये तो वह उक्त राय तथा उसके कारण राज्य सभा को प्रतिवेदित करेगी।
(2) यदि समिति की राय हो कि किसी ओदश से संबंधित कोई अन्य विषय राज्य सभा की सूचना में लाया जाना चाहिये तो वह उक्त राय तथा विषय राज्य सभा को प्रतिवेदित कर सकेगी।
211. प्रतिवेदन का उपस्थान
समिति का प्रतिवेदन राज्य सभा में समिति के अध्यक्ष द्वारा या उसकी अनुपस्थिति में समिति के किसी सदस्य द्वारा उपस्थित किया जायेगा।
212. प्रक्रिया का विनियमन  

समिति, समिति में अधीनस्थ विधान के किसी प्रश्न पर विचार से संबंधित सभी विषयों के बारे में अपनी प्रक्रिया स्वयं निर्धारित करेगी।