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Rajya Sabha
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उप सभापति का निर्वाचन तथा उपसभाध्यक्ष तालिका

7.  उपसभापति का निर्वाचन
(1) उपसभापति का निर्वाचन उस तिथि को होगा जिसे सभापति निश्चित करे और महासचिव प्रत्येक सदस्य को इस तिथि की सूचना भेजेगा।
(2) इस प्रकार से निश्चित तिथि के पहले दिन के मध्याह्न से पूर्व कोई भी सदस्य किसी भी समय इस प्रस्ताव की, कि किसी अन्य सदस्य को राज्य सभा का उपसभापति चुना जाये, महासचिव को सम्बोधित लिखित रूप में सूचना दे सकेगा और उस सूचना का अनुमोदन एक तीसरा सदस्य करेगा और उसके साथ उस सदस्य का, जिसका नाम सूचना में प्रस्थापित किया जाये, यह कथन संलग्न होगा कि निर्वाचित होने पर वह उपसभापति के रूप में कार्य करने को सहमत है :
परन्तु कोई सदस्य एक से अधिक प्रस्ताव प्रस्थापित या अनुमोदित नहीं करेगा।
(3) कार्यावलि में जिस सदस्य के नाम में कोई प्रस्ताव हो, वह पुकारे जाने पर, प्रस्ताव उपस्थित कर सकेगा अथवा प्रस्ताव उपस्थित नहीं करेगा उस अवस्था में वह अपने को केवल उस कथन तक ही सीमित रखेगा।
(4) जो प्रस्ताव उपस्थित तथा विधिवत अनुमोदित हो गये हों वे एक एक करके उसी क्रम में रखे जायेंगे जिसमें कि वे उपस्थित किये गये हों और यदि आवश्यक हुआ तो विभाजन द्वारा उनका निर्णय किया जायेगा। यदि कोई प्रस्ताव स्वीकृत हो जाये तो पीठासीन व्यक्ति, बाद के प्रस्तावों को रखे बिना, घोषित करेगा कि स्वीकृत प्रस्ताव में प्रस्थापित सदस्य राज्य सभा का उपसभापति चुन लिया गया है।
8. उपसभाध्यक्ष तालिका
(1) सभापति, समय समय पर, राज्य सभा के सदस्यों में से अधिक से अधिक छ: उपसभाध्यक्षों की एक तालिका नाम-निर्देशित करेगा जिनमें से कोई एक सभापति तथा उपसभापति की अनुपस्थिति में सभापति या उसकी अनुपस्थिति में उपसभापति के कहने पर, राज्य सभा का सभापतित्व कर सकेगा।
(2) उपनियम (1) के अधीन नाम-निर्देशित उपसभाध्यक्ष नई उपसभाध्यक्ष तालिका नाम-निर्देशित की जाने तक पद धारण करेगा।
9. सभापतित्व करते समय उपसभापति इत्यादि की शक्तियां
उप-सभापति या संविधान अथवा इन नियमों के अधीन राज्य सभा की बैठक का सभापतित्व करने के लिए सक्षम किसी अन्य सदस्य को, जब वह इस प्रकार सभापतित्व कर रहा हो, वही शक्ति प्राप्त होगी जो कि राज्य सभा का सभापतित्व करते हुए सभापति को प्राप्त होती है और इन परिस्थितियों में, इन नियमों में सभापति के प्रति सब निर्देश इस प्रकार सभापतित्व करने वाले व्यक्ति के प्रति निर्देश समझे जायेंगे।