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Rajya Sabha
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लोक हित के विषयों पर प्रस्ताव

167. लोकहित के किसी विषय पर चर्चा

संविधान या इन नियमों द्वारा अन्यथा उपबंधित अवस्था को छोड़कर सभापति की सहमति से किये गये प्रस्ताव के बिना सामान्य लोकहित के विषय पर कोई चर्चा नहीं होगी।

168. सूचना

प्रस्ताव की सूचना लिखित रूप में दी जायेगी और महासचिव को सम्बोधित होगी।

169. ग्राह्यता की शर्तें

कोई प्रस्ताव ग्राह्य हो सके, इसके लिए वह निम्नलिखित शर्तें पूरी करेगा: अर्थात्

(1)  उसमें सारवान रूप से एक निश्चित प्रश्न उठाया जायेगा  

(2)  उसमें तर्क, अनुमान, व्यंग्यात्मक पद, अभ्यारोप या मानहानिकारक कथन नहीं होंगे  

(3)  उसमें व्यक्तियों की सार्वजनिक हैसियत के अतिरिक्त उनके आचरण या चरित्र का निर्देश नहीं होगा :

(4)  वह हाल ही में हुए किसी मामले तक सीमित रहेगा  

(5)  उसमें विशेष अधिकार का प्रश्न नहीं उठाया जायेगा  

(6)  उसमें ऐसे विषय पर फिर चर्चा नहीं चलाई जायेगी जिस पर उसी सत्र में चर्चा हो चुकी हो  

(7)  उसमें ऐसे विषय की चर्चा का पूर्वानुमान नहीं किया जायेगा जिस पर उसी सत्र में चर्चा होने की संभावना हो  और

(8)  वह किसी ऐसे विषय से संबंधित नहीं होगा जो भारत के किसी भाग में क्षेत्राधिकार रखने वाले किसी न्यायालय न्याय निर्णयाधीन हो।

(9) यदि उसमें कोई कथन हो तो सदस्य उस कथन की परिशुद्धता के लिए उत्तरदायी होगा।

(10) उसमें किसी गैर सरकारी सदस्य द्वारा सभा पटल पर रखे गए प्रलेखों अथवा पत्रों के संबंध में चर्चा की मांग नहीं की जाएगी।

(11) उसमें सामान्यत: ऐसे विषयों के संबंध में जानकारी नहीं मांगी जाएगी जो किसी संसदीय समिति के समक्ष विचाराधीन हों  

(12) उसमें राय प्रकट करने या किसी अमूर्त विधि संबंधी प्रश्न या किसी काल्पनिक प्रस्थापना के समाधान के लिए नहीं पूछा जाएगा  

(13) वह किसी ऐसे विषय से संबंधित नहीं होगा जो मुख्यत: भारत सरकार का विषय न हो

(14) उसमें ऐसे विषय नहीं उठाए जाएंगे जो ऐसे निकायों या व्यक्तियों के नियंत्रण में हो जो भारत सरकार के प्रति उत्तरदायी न हों  

(15) उसका किसी ऐसे विषय से संबंध नहीं होगा जिसका मंत्री से आधिकारिक रूप से संबंध नहीं हो  

(16) उसमें किसी मित्र देश के प्रति अशिष्ट उल्लेख नहीं होगा  

(17) वह मंत्रिमंडलीय चर्चा या किसी ऐसे मामले के संबंध में, जिसके बारे में सांविधानिक, सांविधिक अथवा पारंपरिक दायित्व है कि सूचना न दी जाए, जैसे गोपनीय स्वरूप के विषयों के बारे में सूचना देने के संबंध नहीं होगा  

(18) उसमें तुच्छ विषयों के संबंध में जानकारी नहीं मांगी जाएगी।

170. सभापति ग्राह्यता का निर्णय करेगा

यदि सभापति किसी प्रस्ताव की सूचना ग्रहण कर ले और ऐसे प्रस्ताव की चर्चा के लिए कोई तिथि निश्चित न की गई हो तो वह राज्य सभा समाचार में 'अनियत दिन वाले प्रस्ताव' शीर्षक के साथ तुरन्त अधिसूचित किया जायेगा।

171. अनियत दिन वाले प्रस्तावों का अधिसूचित किया जाना

सभापति किसी प्रस्ताव की ग्राह्यता का निर्णय करेगा और वह किसी प्रस्ताव अथवा उसके किसी भाग को अस्वीकार कर सकेगा, जबकि वह उसकी राय में इन नियमों का पालन न करता हो।

172. चर्चा के लिए समय का नियतन

सभापति, राज्य सभा की कार्य की स्थिति पर विचार करने के बाद और राज्य सभा के

नेता के परामर्श से, ऐसे किसी प्रस्ताव पर चर्चा के लिए कोई एक दिन या एक से अधिक दिन या किसी दिन का भाग नियत कर सकेगा।

173. निश्चित समय पर प्रस्ताव पर मत लिया जाना

सभापति, यथास्थिति, नियत दिन या नियत दिनों के अन्तिम दिन निश्चित समय पर मूल प्रस्ताव राज्य सभा का निर्णय निर्धारित करने के लिए आवश्यक प्रत्येक प्रस्ताव पर तुरन्त मत लेगा।

174. भाषणों के लिए समय-सीमा

उप सभापति, यदि वह ठीक समझे, भाषणों के लिए समय-सीमा विहित कर सकेगा।

175. (हटा दिया गया है।)