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Rajya Sabha

याचिकायें

137. याचिकायें

याचिकायें सभापति की सहमति से इन नियमों के अनुसार राज्य सभा को उपस्थित या प्रस्तुत की जा सकेंगी।

138. परिधि  

याचिकाओं का संबंध निम्नलिखित से होगा -

(1)  ऐसा विधेयक जो नियम 61 के अधीन प्रकाशित किया गया हो अथवा पुर:स्थापित किया गया हो अथवा जिसके बारे में इन नियमों के अधीन प्रस्ताव की सूचना प्राप्त हुई हो  

(2)  कोई ऐसा अन्य विषय जो राज्य सभा के विचाराधीन कार्य से संबंधित हो  और

(3)  कोई विषय जो सामान्य लोक हित का हो परन्तु ऐसा न हो -

( क )  जो भारत के किसी भाग में क्षेत्राधिकार रखने वाले किसी न्यायालय या किसी जांच न्यायालय या किसी परिनियत न्यायाधिकरण प्राधिकारी या किसी अर्धन्यायिक निकाय या आयोग के संज्ञान में हो :

( ख )  जिससे ऐसे विषय उठते हों जिनसे भारत सरकार मुख्यतया संबंधित न हो  

( ग )  जो किसी मूल प्रस्ताव या संकल्प के द्वारा उठाया जा सकता हो  अथवा

( घ )  जिसके लिये, विधि के अधीन, जिनमें नियम, विनियम, उपविधियां सम्मिलित होंगी जो केन्द्रीय सरकार या किसी ऐसे प्राधिकारी द्वारा बनाये गये हों जिसे ऐसे नियम, विनियम या उपविधियां बनाने की शक्ति प्रत्यायोजित की गई हो, उपचार उपलब्ध है।

139. सामान्य प्ररूप

(1) प्रथम अनुसूची में दिया गया याचिका का सामान्य प्ररूप, ऐसे परिवर्तनों के साथ जो प्रत्येक मामले की परिस्थितियों में अपेक्षित हो, उपयोग में लाया जा सकेगा और यदि उपयोग में लाया जाये तो वह पर्याप्त होगा। 

(2) प्रत्येक याचिका सम्मानपूर्ण और संयत भाषा में लिखी जायेगी।

(3) प्रत्येक याचिका हिन्दी में या अंग्रेजी में होगी। यदि कोई याचिका किसी अन्य भाषा में दी जाये तो उसके साथ उसका हिन्दी या अंग्रेजी अनुवाद संलग्न होगा और उस पर याचिका देने वाले के हस्ताक्षर होंगे।

140. हस्ताक्षरकर्ताओं का प्रमाणीकरण

याचिका के प्रत्येक हस्ताक्षरकर्ता का पूरा नाम और पता उसमें दिया जायेगा और उसका प्रमाणीकरण हस्ताक्षरकर्ता द्वारा, यदि साक्षर हो तो उसके हस्ताक्षर से और यदि निरक्षर हो तो उसके अंगूठे के निशान से किया जायेगा।

141. प्रलेखों का संलग्न न किया जाना

किसी याचिका के साथ पत्र, शपथ-पत्र या अन्य प्रलेख संलग्न नहीं किये जायेंगे।

142. प्रतिहस्ताक्षर

यदि याचिका किसी सदस्य द्वारा उपस्थित की जाये तो प्रत्येक याचिका पर वह प्रतिहस्ताक्षर करेगा।

143. याचिका किसे सम्बोधित की जायेगी और किस प्रकार समाप्त होगी

प्रत्येक याचिका राज्य सभा को संबोधित की जायेगी और जिस विषय से उसका संबंध हो उसके बारे में याचिका देने वाले के निश्चित उद्देश्य का वर्णन करने वाली प्रार्थना के साथ समाप्त होगी।

144. उपस्थापन की सूचना

सदस्य महासचिव को याचिका उपस्थित करने के अपने इरादे की पूर्व सूचना देगा।

145. याचिका का उपस्थापन

याचिका सदस्य द्वारा उपस्थित की जा सकेगी या महासचिव को भेजी जा सकेगी, बाद की अवस्था में वह राज्य सभा को उस तथ्य की सूचना देगा और ऐसी सूचना दिये जाने पर किसी वाद-विवाद की अनुमति नहीं दी जायेगी।

146. उपस्थापन का प्रपत्र

याचिका उपस्थित करने वाला सदस्य अपने को निम्न रूप के कथन तक ही सीमित रखेगा:-

"मैं ................ के संबंध में ................... याचिका देने वाले ( वालों ) द्वारा हस्ताक्षरित याचिका उपस्थित करता हूं।"

और इस कथन पर किसी वाद-विवाद की अनुमति नहीं दी जायेगी।

147. याचिका समिति का गठन 

(1) सभापति समय समय पर एक याचिका समिति नाम-निर्देशित करेगा जिसमें दस सदस्य होंगे। 

(2) उपनियम (1) के अधीन नाम-निर्देशित समिति तब तक कार्य करती रहेगी जब तक नई समिति को नाम-निर्देशित न कर दिया जाये। 

(3) समिति में आकस्मिक रूप से रिक्त हुए स्थानों की पूर्ति सभापति द्वारा की जायेगी।

148. गणपूर्ति

समिति की गणपूर्ति पांच से होगी।

149. समिति का अध्यक्ष 

(1) समिति का अध्यक्ष सभापति द्वारा समिति के सदस्यों में से नियुक्त किया जायेगा: परन्तु यदि उप सभापति समिति का सदस्य हो तो वह समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया जायेगा। 

(2) यदि समिति का अध्यक्ष किसी कारण से कार्य करने में असमर्थ हो तो सभापति उसी प्रकार से उसके स्थान में समिति का अन्य अध्यक्ष नियुक्त कर सकेगा।

 (3) यदि समिति का अध्यक्ष किसी बैठक से अनुपस्थित हो तो समिति किसी अन्य सदस्य को उस बैठक में समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए चुनेगी।

150. याचिका को समिति को सौंपा जाना

प्रत्येक याचिका, यथास्थिति, सदस्य द्वारा उपस्थित किये जाने अथवा महासचिव द्वारा सूचित किये जाने के बाद याचिका समिति को सौंपी गई समझी जायेगी।

151. याचिकाओं की जांच तथा उनका परिचालन

 (1) समिति उसे सौंपी गई प्रत्येक याचिका की जांच करेगी और यदि याचिका में इन नियमों का पालन किया गया हो तो समिति स्वविवेक से यह निदेश दे सकेगी कि उसे परिचालित किया जाये। जहां याचिका को परिचालित करने का निदेश न दिया गया हो तो सभापति किसी भी समय निदेश दे सकेगा कि याचिका को परिचालित किया जाये। 

(2)  याचिका उसके विस्तृत रूप में अथवा संक्षिप्त रूप में परिचालित की जाएगी जैसा कि, यथास्थिति, समिति अथवा सभापति निदेश दें।

152. समिति का प्रतिवेदन 

(1) समिति राज्य सभा को प्रतिवेदित करते हुए बतायेगी कि याचिका का विषय क्या है, उस पर हस्ताक्षर करने वालों की संख्या क्या है और वह इन नियमों के अनुसार है या नहीं और यह भी बतायेगी कि उसे परिचालित करने का निदेश दिया गया है या नहीं। 

(2) समिति का यह भी कर्तव्य होगा कि उसे सौंपी गई याचिका में की गई विशिष्ट शिकायतों को वह, ऐसा साक्ष्य प्राप्त करने के बाद जिसे वह ठीक समळो, राज्य सभा को प्रतिवेदित करे और विचाराधीन मामले से संबंधित, ठोस रूप में या भविष्य में ऐसे मामले रोकने के लिए उपचारी उपायों का सुझाव दें।

153. प्रतिवेदन का उपस्थापन

समिति का प्रतिवेदन समिति के अध्यक्ष द्वारा अथवा उसकी अनुपस्थिति में समिति के किसी सदस्य द्वारा राज्य सभा के समक्ष उपस्थित किया जायेगा।