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Rajya Sabha
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राष्ट्रपति का अभिभाषण और राज्य सभा को संदेश

14.राष्ट्रपति के विशेष अभिभाषण पर चर्चा के लिए समय का नियतन

सभापति, संविधान के अनुच्छेद 87 के खंड (1) के अधीन सभाओं के सामने दिये गये राष्ट्रपति के अभिभाषण में निर्दिष्ट विषयों की चर्चा के लिए, राज्य सभा के नेता के परामर्श से समय नियत करेगा।

15. चर्चा की परिधि

ऐसे दिन या दिनों में अथवा किसी दिन के भाग में राज्य सभा किसी सदस्य द्वारा उपस्थित तथा अन्य सदस्य द्वारा अनुमोदित धन्यवाद के प्रस्ताव पर ऐसे अभिभाषण में निर्दिष्ट विषयों की चर्चा करने के लिए स्वतंत्र होगी।

16. संशोधन

ऐसे धन्यवाद के प्रस्ताव पर ऐसे रूप में संशोधन उपस्थित किये जा सकेंगे जिसे सभापति उपयुक्त समझे।

17. अन्य कार्य जो लिया जा सकेगा

(1) इस बात के होते हुए भी कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के लिए कोई दिन नियत किया जा चुका है,--

( क ) ऐसे दिन किसी विधेयक या किन्हीं विधेयको को पुर:स्थापित करने की अनुमति के लिए प्रस्ताव किया जा सकेगा या किये जा सकेंगे और विधेयक या ु विधेयकों को पुर:स्थापित किया जा सकेगा  और

( ख ) ऐसे दिन अभिभाषण पर राज्य सभा द्वारा चर्चा प्रारम्भ किये जाने या जारी रखे जाने से पूर्व औपचारिक प्रकार का अन्य कार्य किया जा सकेगा।

  1. (2) यह प्रस्ताव किये जाने पर कि अभिभाषण पर चर्चा सभापति द्वारा नियत किये जाने वाले बाद के किसी दिन तक के लिए स्थगित की जाये, उस अभिभाषण पर चर्चा किसी सरकारी विधेयक या अन्य सरकारी कार्य के पक्ष में स्थगित की जा सकेगी। सभापति तुरन्त प्रस्ताव पर मत लेगा, किसी संशोधन या वाद-विवाद की अनुमति नहीं होगी।

18. सरकार का उत्तर देने का अधिकार

सरकार की ओर से प्रधान मंत्री या किसी अन्य मंत्री को, चाहे उसने चर्चा में पहले भाग लिया हो या नहीं, चर्चा के अंत में सरकार की स्थिति स्पष्ट करने का सामान्य अधिकार होगा।  

19. भाषणों के लिये समय-सीमा

सभापति, यदि वह ठीक समझे, राज्य सभा का अभिप्राय मालूम करके भाषणों के लिए समय-सीमा विहित कर सकेगा।

20. संविधान के अनुच्छेद 86 (1) के अधीन राष्ट्रपति का अभिभाषण

सभापति, संविधान के अनुच्छेद 86 के खण्ड (1) के अधीन राष्ट्रपति के अभिभाषण में निर्दिष्ट विषयों की चर्चा के लिए राज्य सभा के नेता के परामर्श से समय नियत कर सकेगा।

21. राष्ट्रपति से संदेश

जब सभापति को राज्य सभा के लिए संविधान के अनुच्छेद 86 के खण्ड ( 2 ) के अधीन राष्ट्रपति से संदेश मिले तो वह राज्य सभा को संदेश पढ़ कर सुनायेगा और संदेश में निर्दिष्ट विषयों पर विचार करने के लिए अनुकरणीय प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक निदेश देगा। ऐसे निदेश देने में सभापति को उस सीमा तक नियमों को निलम्बित या परिवर्तित करने की शक्ति प्राप्त होगी जिस सीमा तक कि आवश्यक हो।

22. ( हटा दिया गया है। )