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Rajya Sabha

प्रश्न

 

38.प्रश्नों के लिए समय

जब तक सभापति अन्यथा निदेश न दें, प्रत्येक बैठक का पहला घंटा प्रश्न पूछे जाने और उनके उत्तर दिए जाने के लिए उपलब्ध होगा।

39. प्रश्नों की सूचना

जब तक सभापति अन्यथा निदेश न दें, प्रश्न के लिए कम से कम पूरे 15 दिन की सूचना दी जाएगी।

40. प्रश्नों की सूचना का रूप

प्रश्न की सूचना महासचिव को लिखित रूप में दी जाएगी और उसमें इन बातों का उल्लेख होगा:-

  1. प्रश्न जिस मंत्री को संबोधित हो उसके अधिकारीय पद का नाम; और
  2. (ख) वह तिथि जिसको की प्रश्न उत्तर के लिए प्रश्न-सूची में रखवाने का विचार है।

41. प्रश्नों के ग्राह्य होने की मंत्रियों को सूचना

जब तक सभापति अन्यथा निदेश न दें, कोई प्रश्न उत्तर के लिए प्रश्न-सूची में तब तक नहीं रखा जायेगा जब तक कि महासचिव द्वारा ऐसे प्रश्न की सूचना उस मंत्री को, जिसे वह संबोधित हो, दिए हुए पांच दिन न बीत गये हों।

42.तारांकित प्रश्न

जो सदस्य अपने प्रश्न का मौखिक उत्तर चाहता हो, वह तारांक लगाकर उसका विभेद करेगा और यदि वह प्रश्न पर तारांक लगाकर विभेद न करे, तो वह प्रश्न लिखित उत्तर के लिए प्रश्नों की सूची में मुद्रित किया जायेगा।

43.तारांकित प्रश्नों की संख्या की सीमा

(1) मौखिक उत्तर के लिए किसी एक दिन की प्रश्न-सूची में एक ही सदस्य के तारांक लगाकर विभेद किये गये तीन से अधिक प्रश्न नहीं रखे जायेंगे। तीन से अधिक प्रश्न लिखित उत्तर के लिए प्रश्न-सूची में रख दिये जायेंगे।

(2) सूचना देने वाला सदस्य यह दर्शायेगा कि मौखिक उत्तर के लिए प्रश्न किस क्रम में रखे जायें और यदि ऐसा कोई क्रम न दर्शाया जाये तो प्रश्न मौखिक उत्तर के लिए प्रश्न-सूची में उस क्रम में रख दिये जायेंगे जिस समय-क्रम में उनकी सूचनायें प्राप्त हुई हैं।(2) The

44.प्रश्नों के लिए दिन नियत करना

प्रश्नों का उत्तर देने के लिए उपलब्ध समय ऐसे मंत्रालय या मंत्रालयों से सम्बद्ध प्रश्नों का उत्तर देने के लिए भिन्न-भिन्न दिनों में चक्रानुक्रम से उस प्रकार नियत किया जायेगा जैसे कि सभापति समय-समय पर उपबन्धित करे, और प्रत्येक ऐसे दिन जब तक कि सभापति सम्बद्ध मंत्री की सहमति से अन्यथा निदेश न दे, केवल ऐसे मंत्रालय या मंत्रालयों से सम्बद्ध प्रश्न ही, जिनके लिए उस दिन समय नियत किया गया हो मौखिक उत्तर के लिए प्रश्न-सूची में रखे जायेंगे।

45.तारांकित प्रश्न जिनका मौखिक उत्तर न दिया गया हो

यदि किसी दिन मौखिक उत्तर के लिए प्रश्न सूची में रखे गये किसी प्रश्न को उस दिन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए उपलब्ध समय में उत्तर के लिए न पुकारा जाये तो ऐसे प्रश्न को लिखित प्रश्नों का समय समाप्त होने पर अथवा मौखिक उत्तर के लिए प्रश्नों के निपटारे के तुरन्त पश्चात्, यथास्थिति, सम्बद्ध मंत्री द्वारा पटल पर रख दिया गया माना जायेगा:

परन्तु यह कि यदि सभापति द्वारा पुकारे जाने पर कोई सदस्य यह कहेगा कि अपने नाम में रखे हुए प्रश्न को पूछने का उसका इरादा नहीं है, तो उस प्रश्न को वापिस ले लिया जाना माना जायेगा और कोई लिखित उत्तर पटल पर रखा गया नहीं माना जायेगा।

46. गैर-सरकारी सदस्यों से प्रश्न

प्रश्न किसी सदस्य द्वारा अन्य गैर-सरकारी सदस्य को सम्बोधित किया जा सकेगा, यदि प्रश्न का विषय किसी ऐसे विधेयक, संकल्प अथवा राज्य सभा के कार्य के अन्य विषय से संबंधित हो, जिसके लिए वह सदस्य उत्तरदायी हो और ऐसे प्रश्नों के संबंध में यथासंभव उसी प्रक्रिया का, जो किसी मंत्री को सम्बोधित प्रश्नों के संबंध में प्रयुक्त की जाती है, ऐसे परिवर्तनों के साथ अनुसरण किया जायेगा जो सभापति आवश्यक या सुविधाजनक समळों।

47. प्रश्नों की ग्राह्यता की शर्तें

(1) इस नियम के उपनियम (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, लोक महत्व के किसी ऐसे विषय पर जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रश्न पूछा जा सकेगा जो उस मंत्री के विशेष संळ्ाान में हो जिसे वह सम्बोधित किया गया हो।

 

  1. प्रश्न पूछने का अधिकार निम्नलिखित शर्तों के अधीन है:-
    1. (i) वह सटीक, विशिष्ट और केवल एक मुद्दे के लिए सीमित होगा;
    2. उसमें कोई ऐसा नाम या कथन नहीं होगा जो प्रश्न को सुबोध बनाने के लिए सर्वथा आवश्यक न हो;
    3. यदि उसमें कोई कथन हो तो सदस्य को उस कथन की परिशुद्धता के लिए उत्तरदायी होना पड़ेगा;
    4. उसमें तर्क, अनुमान, व्यंग्यात्मक पद, अभ्यारोप, विशेषण या मानहानिकारक कथन नहीं होंगे;
    5. उसमें राय प्रकट करने या किसी अमूर्त विधि संबंधी प्रश्न या किसी काल्पनिक प्रस्थापना के समाधान के लिए नहीं पूछा जायेगा;
    6. उसमें किसी व्यक्ति की पदेन या सार्वजनिक हैसियत के अतिरिक्त उसके चरित्र या आचरण के बारे में नहीं पूछा जायेगा;
    7. उसमें सामान्यत: 100 से अधिक शब्द नहीं होंगे;
    8. वह किसी ऐसे विषय से संबंधित न होगा जो मुख्यतया भारत सरकार का विषय न हो;
    9. उसमें सामान्यत: ऐसे विषयों के बारे में जानकारी नहीं मांगी जाएगी जो किसी संसदीय समिति के समक्ष विचाराधीन हों;
    10. उसमें किसी संसदीय समिति की ऐसी कार्यवाही के बारे में नहीं पूछा जायगा जो उस समिति के प्रतिवेदन द्वारा राज्य सभा के सामने न रखी गई हो;
    11. उसमें किसी ऐसे व्यक्ति के चरित्र या आचरण पर अभ्युक्ति नहीं की जायेगी जिसके आचरण पर केवल मूल प्रस्ताव के द्वारा ही आपत्ति की जा सकती हो;
    12. उसमें व्यक्तिगत रूप का दोषारोपण नहीं किया जायेगा और न वह दोषारोपण ध्वनित होगा;
    13. उसमें नीति संबंधी ऐसे प्रश्न नहीं उठाये जायेंगे जो इतने विस्तीर्ण हों कि प्रश्न के उत्तर की सीमा के भीतर न आ सकें;
    14. उसमें ऐसे प्रश्नों की सारत: पुनरुक्ति नहीं होगी जिनके उत्तर पहले दिये जा चुके हों या जिनका उत्तर देना अस्वीकार कर दिया गया हो;
    15. उसमें नगण्य विषयों पर जानकारी नहीं मांगी जाएगी;
    16. उसमें साधारणतया विगत इतिहास के विषयों पर जानकारी नहीं मांगी जायेगी;
    17. उसमें ऐसी जानकारी नहीं मांगी जायेगी जो सुलभ प्रलेखों या साधारण संदर्भ कृतियों में दी गई हो;
    18. उसमें ऐसे विषय नहीं उठाये जायेंगे जो ऐसे निकायों या व्यक्तियों के नियंत्रण में हों जो मुख्यतया भारत सरकार के प्रति उत्तरदायी न हों;
    19. उसमें किसी ऐसे विषय के संबंध में जानकारी नहीं मांगी जाएगी जो भारत के किसी भाग में क्षेत्राधिकार रखने वाले किसी न्यायालय के न्यायनिर्णयाधीन हो;
    20. उसका किसी ऐसे विषय से संबंध नहीं होगा जिससे मंत्री पदेन संबंधित न हो;
    21. उसमें किसी मित्र देश के प्रति अशिष्ट निर्देश नहीं होगा; और
    22. उसमें ऐसे विषयों के संबंध में जानकारी नहीं मांगी जायेगी जो गोपनीय प्रकार के हों।

48. भारत सरकार तथा राज्य सरकार के बीच पत्र-व्यवहार के विषयों पर प्रश्न

जिन विषयों पर भारत सरकार और किसी राज्य सरकार के बीच पत्र-व्यवहार हो रहा हो या हो चुका हो, उनके बारे में तथ्यात्मक विषयों को छोड़कर कोई प्रश्न नहीं पूछा जायेगा और उत्तर तथ्य कथन तक ही सीमित होगा।

49.सभापति ग्राह्यता का निर्णय करेगा

(1)(1) सभापति इसका निर्णय करेगा कि कोई प्रश्न या उसका कोई भाग इन नियमों के अधीन ग्राह्य है अथवा नहीं और वह कोई प्रश्न या उसका कोई भाग अस्वीकृत कर सकेगा जो उसकी राय में प्रश्न पूछने के अधिकार का दुरूपयोग हो या सभा की प्रक्रिया में बाधा डालने या उस पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए किया गया हो या इन नियमों का उल्लंघन करता हो।

(2) नियम 44 के उपबंधों के अधीन रहते हुये यदि सभापति यह राय रखता हो कि यह निर्णय करने के लिए कि प्रश्न ग्राह्य है या नहीं, अधिक समय की आवश्यकता है तो वह निदेश दे सकेगा कि किसी प्रश्न को प्रश्न-सूची में उत्तर के लिए सदस्य द्वारा अपनी सूचना में उल्लिखित तिथि के बाद की किसी तिथि को रखा जाये।(

50. सभापति निर्णय करेगा कि किस प्रश्न का मौखिक उत्तर दिया जाये

यदि सभापति की राय में मौखिक उत्तर के लिए रखा गया कोई प्रश्न ऐसे स्वरूप का है कि उसका लिखित उत्तर अधिक उचित होगा तो सभापति निदेश दे सकेगा कि ऐसा प्रश्न लिखित उत्तर के लिए प्रश्न-सूची में रख दिया जाए :

परन्तु सभापति, यदि वह ठीक समळो, मौखिक उत्तर के लिए प्रश्न की सूचना देने वाले सदस्य से मौखिक उत्तर चाहने के कारणों को संक्षेप में बताने के लिए कह सकेगा और उन पर विचार करने के बाद अपना निदेश देगा।

51. प्रश्न-सूची

जो प्रश्न अस्वीकृत न हुये हों, वे सभापति के आदेश के अनुसार उस दिन की, यथास्थिति, मौखिक या लिखित उत्तर के लिए प्रश्न-सूची में दर्ज कर दिए जायेंगे।/p>

51क. मौखिक और लिखित उत्तरों के लिए प्रश्नों की संख्या की सीमा

किसी एक दिन के लिए मौखिक और लिखित उत्तर के लिए प्रश्नों की सूचियों में शामिल किये जाने वाले प्रश्नों की कुल संख्या 175 तक सीमित होगी, जिसमें मौखिक उत्तर के लिए 20 प्रश्न, लिखित उत्तर के लिए प्रश्नों की एक सूची से दूसरी सूची में स्थगित किए गए प्रश्न तथा राष्ट्रपति शासनाधीन राज्यों से संबंधित 15 प्रश्न शामिल हैं।

52.. प्रश्नों के पुकारे जाने का क्रम

मौखिक उत्तर के लिए प्रश्न, प्रश्नों के लिए उपलब्ध किये गये समय के भीतर, बैठक में किसी अन्य कार्य को प्रारम्भ करने से पहले, उस क्रम से पुकारे जायेंगे जिसमें कि वे सूची में दिये गये हों :

परन्तु जिस प्रश्न का मौखिक उत्तर देने के लिए समय नहीं बचा हो और यदि मंत्री सभापति से अभ्यावेदन करे कि वह प्रश्न विशेष लोक-हित का है और उसका वह उत्तर देना चाहता है तो सभापति की अनुळ्ाा से 'प्रश्नों के समय' के बाद उसका उत्तर दिया जा सकेगा।

53. प्रश्नों का वापस लिया जाना या स्थगित किया जाना

कोई सदस्य उस बैठक के पहले, जिसके लिए उसका प्रश्न सूची में रखा गया है, किसी भी समय सूचना देकर अपने प्रश्न को वापस ले सकेगा या उसे सूची में उल्लिखित किये जाने वाले बाद के किसी दिन के लिये स्थगित कर सकेगा और बाद के ऐसे दिन वह प्रश्न, नियम 44 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, सूची में उन सब प्रश्नों के बाद रखा जाएगा जो इस तरह स्थगित न किये गये हों :

परन्तु स्थगित किया गया कोई प्रश्न सूची में तब तक नहीं रखा जाएगा जब तक कि महासचिव को स्थगन की सूचना प्राप्त होने के समय से पूरे दो दिन समाप्त न हो गये हों।

54. प्रश्न पूछने की रीति

(1) प्रश्न पूछने का समय आने पर सभापति प्रत्येक ऐसे सदस्य को, जिसके नाम में प्रश्न-सूची में कोई प्रश्न हो, क्रम से पुकारेगा।

(2) इस प्रकार पुकारा गया सदस्य अपने स्थान पर खड़ा होगा और जब तक वह यह न कहे कि अपने नाम में रखे हुए प्रश्न को पूछने का उसका इरादा नहीं है, वह उस प्रश्न को प्रश्न-सूची में उसके क्रमांक के निर्देश से पूछेगा।

(3) यदि प्रश्न पुकारे जाने पर न पूछा जाये या जिस सदस्य के नाम में वह प्रश्न हो, वह अनुपस्थिति हो, तो सभापति, किसी सदस्य की प्रार्थना पर, निदेश दे सकेगा कि उसका उत्तर दिया जाये।

55. अनुपस्थित सदस्यों के प्रश्न

जब मौखिक उत्तरों के लिए प्रश्नों की सूची के सब प्रश्न पुकारे जा चुके हों, तो सभापति यदि समय बचा हो, ऐसे किसी प्रश्न को फिर से पुकार सकेगा, जो उस सदस्य की अनुपस्थिति के कारण न पूछा गया हो जिसके नाम पर प्रश्न हो और किसी सदस्य को अन्य किसी सदस्य के नाम में रखे हुए प्रश्न को भी पूछने की अनुळ्ाा दे सकेगा, यदि उस सदस्य ने उसे इस तरह का प्राधिकार दिया हो।

56. अनुपूरक प्रश्न

(1) नियम 38 के अधीन प्रश्नों के समय में किसी प्रश्न या किसी प्रश्न के उत्तर के संबंध में चर्चा की अनुळ्ाा नहीं होगी।

(2) कोई सदस्य, सभापति द्वारा पुकारे जाने पर, किसी ऐसे तथ्यात्मक विषय के और अधिक स्पष्टीकरण के प्रयोजन के लिये, जिसके बारे में उत्तर दिया गया है अनुपूरक प्रश्न पूछ सकेगा:

परन्तु यदि सभापति की राय में किसी अनुपूरक प्रश्न से प्रश्नों से संबंधित नियम भंग होते हों तो वह अनुपूरक प्रश्न पूछने की अनुमति नहीं देगा।/

57. उत्तर में सभा की कार्यवाही का निर्देश नहीं किया जायेगा

राज्य सभा में किसी प्रश्न के उत्तर में सभा के चालू सत्र के दौरान दिये गये किसी प्रश्न के उत्तर या सभा की कार्यवाही की ओर निर्देश नहीं किया जायेगा।

58. अल्प-सूचना प्रश्न

(1) लोक महत्व के विषय के संबंध में कोई प्रश्न पूरे पन्द्रह दिन से कम समय की सूचना पर पूछा जा सकेगा और यदि सभापति की यह राय हो कि प्रश्न अविलम्बनीय प्रकार का है तो वह निदेश दे सकेगा कि संबंधित मंत्री से पूछताछ की जाये कि वह उत्तर देने की स्थिति में है या नहीं और यदि है, तो किस तारीख को।

(2) यदि संबंधित मंत्री उत्तर देने की स्थिति में हो, तो ऐसे प्रश्न का उत्तर उसके द्वारा बताये गये दिन तथा ऐसे समय दिया जाएगा जिसे सभापति निश्चित करे।

(3) यदि मंत्री अल्प-सूचना पर प्रश्न का उत्तर देने की स्थिति में न हो और सभापति की यह राय हो कि प्रश्न इतने पर्याप्त लोक महत्व का है कि राज्य सभा में उसका मौखिक उत्तर दिया जाना चाहिये तो वह निदेश दे सकेगा कि प्रश्न उस दिन की प्रश्न सूची में प्रथम प्रश्न के रूप में रखा जाए, जिस दिन कि नियम 39 के अधीन उसका उत्तर दिया जा सकता हो:

परन्तु किसी एक दिन की प्रश्न-सूची में ऐसे एक से अधिक प्रश्नों को प्रथम पूर्ववर्तिता प्रदान नहीं की जायेगी।

(4) यदि कोई सदस्य किसी प्रश्न का मौखिक उत्तर अल्प-सूचना पर चाहे तो वह संक्षेप में अल्प-सूचना पर प्रश्न पूछने के कारण बतायेगा। यदि प्रश्न की सूचना में कोई कारण न दिये गये हों तो प्रश्न सदस्य को लौटा दिया जायेगा।

(5) वह सदस्य, जिसने प्रश्न की सूचना दी हो सभापति द्वारा बुलाये जाने पर प्रश्नों की सूची में उसकी संख्या का उल्लेख करते हुए प्रश्न पूछेगा और संबंधित मंत्री तुरंत उत्तर देगा।

(6) अन्य मामलों में अल्प-सूचना प्रश्नों के लिये प्रक्रिया वही होगी जो मौखिक उत्तर के लिये साधारण प्रश्नों के लिए है तथा इसमें सभापति ऐसे संशोधन कर सकेगा जिन्हें वह आवश्यक या सुविधाजनक समळो।

59. प्रश्नों के उत्तरों का पूर्व प्रकाशन नहीं होगा

प्रश्नों के उत्तर, जो मंत्री सभा में देना चाहते हों, तब तक प्रकाशनार्थ नहीं दिये जायेंगे; जब तक कि वास्तव में वे राज्य सभा में न दिये जा चुके हों या सभा पटल पर न रखे जा चुके हों।