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Rajya Sabha
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विशेषाधिकार के प्रश्न

187. विशेषाधिकार का प्रश्न

इन नियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुये, कोई भी सदस्य, सभापति की सहमति से, कोई ऐसा प्रश्न उठा सकेगा जिसमें या तो किसी सदस्य के या राज्य सभा के या उसकी किसी समिति के विशेषाधिकार का उल्लंघन अन्तर्ग्रस्त हो।

188. सूचना

जो सदस्य विशेषाधिकार का प्रश्न उठाने का इच्छुक हो वह उसकी लिखित सूचना उस दिन की बैठक प्रारम्भ होने से पूर्व जिस दिन कि प्रश्न उठाने का विचार हो, महासचिव को देगा। यदि उठाये जाने के लिए प्रस्थापित प्रश्न किसी प्रलेख पर आधारित हो तो सूचना के साथ वह प्रलेख भी संलग्न होगा।

189. ग्राह्यता की शर्तें

विशेषाधिकार का प्रश्न उठाने का अधिकार निम्नलिखित शर्तों के अधीन होगा, अर्थात्:-

(1) प्रश्न हाल ही में हुए किसी विशिष्ट मामले तक सीमित रहेगा  और

(2) मामले में राज्य सभा का हस्तक्षेप अपेक्षित होगा।

190. विशेषाधिकार का प्रश्न उठाने की रीति

(1) सभापति, यदि नियम 187 के अधीन सहमति दे और यह ठहराये कि चर्चा के लिये प्रस्थापित विषय नियमानुकूल है तो वह प्रश्नों के बाद और कार्यावलि का कार्य प्रारम्भ करने से पहले, संबंधित सदस्य को पुकारेगा जो अपने स्थान पर खड़ा होगा और विशेषाधिकार का प्रश्न उठाने की अनुमति मांगते हुए उससे संगत एक संक्षिप्त वक्तव्य देगा। परन्तु जब सभापति ने नियम 187 के अधीन अपनी सहमति देने से इन्कार कर दिया हो या उसकी राय हो कि चर्चा के लिये प्रस्थापित विषय नियमानुकूल नहीं है तो, यदि वह आवश्यक समझे, उस विशेषाधिकार के प्रश्न की सूचना को पढ़ कर सुना सकेगा कि वह सहमति देने से इन्कार करता है या विशेषाधिकार के प्रश्न की सूचना को नियमानुकूल नहीं ठहराता : परन्तु यह और भी कि यदि सभापति का विषय की 'अविलम्बनीयता के संबंध में समाधान हो जाये तो वह प्रश्नों के निबटाये जाने के बाद बैठक के दौरान किसी भी समय विशेषाधिकार का प्रश्न उठाये जाने की अनुमति दे सकेगा।

(2) यदि अनुमति दी जाने पर आपत्ति की जाये तो सभापति उन सदस्यों से जो अनुमति दिये जाने के पक्ष में हो, अपने स्थानों पर खड़े होने के लिये कहेगा, और तदनुसार यदि कम से कम पच्चीस सदस्य खड़े हों, तो सभापति सूचित करेगा कि अनुमति दी जाती है। यदि पच्चीस से कम सदस्य खड़े हों, तो सभापति सदस्य को सूचित करेगा कि उसे राज्य सभा की अनुमति नहीं है।

191. विशेषाधिकार समिति को प्रश्न का सौंपा जाना

यदि नियम 190 के अधीन अनुमति दे दी जाये, तो राज्य सभा प्रश्न पर विचार कर सकेगी और निर्णय कर सकेगी अथवा या तो उस सदस्य द्वारा जिसने विशेषाधिकार का प्रश्न उठाया है या किसी अन्य सदस्य द्वारा किये गये प्रस्ताव पर उसे विशेषाधिकार समिति को सौंप सकेगी।

192. विशेषाधिकार समिति का गठन

(1) सभापति, समय-समय पर एक विशेषाधिकार समिति नाम-निर्देशित करेगा जिसमें दस सदस्य होंगे।

(2) उपनियम (1) के अधीन नाम-निर्देशित समिति कोई नई समिति नाम-निर्देशित होने तक कार्य करती रहेगी।

(3) समिति में आकस्मिक रूप में रिक्त हुए स्थानों की पूर्ति सभापति द्वारा की जायेगी।

193 . समिति का अध्यक्ष

(1) समिति का अध्यक्ष समिति के सदस्यों में से सभापति द्वारा नियुक्त किया जायेगा।

(2) यदि समिति का अध्यक्ष किसी कारण से कार्य करने में असमर्थ हो तो सभापति उसी प्रकार से उसके स्थान पर समिति का एक अन्य अध्यक्ष नियुक्त कर सकेगा।

(3) यदि समिति का अध्यक्ष किसी बैठक से अनुपस्थित रहे तो समिति किसी अन्य सदस्य को उस बैठक में समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिये चुनेगी।

194. गणपूर्ति

समिति की गणपूर्ति पांच से होगी।

195. प्रश्न की जांच

(1) समिति उसे सौंपे गये प्रत्येक प्रश्न की जांच करेगी और प्रत्येक मामले के तथ्यों के अनुसार यह निर्धारित करेगी कि किसी विशेषाधिकार का उल्लंघन अन्तर्ग्रस्त है या नही, और यदि है, तो किस स्वरूप का है और किन परिस्थितियों में हुआ है और ऐसी सिफारिश करेगी जो वह ठीक समझे ।

(2) इस नियम के उपनियम (1) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, प्रतिवेदन में यह भी बताया जा सकेगा कि राज्य सभा समिति द्वारा दी गई सिफारिशों को प्रभावी करने में किस प्रक्रिया का अनुसरण करे।

196. साक्ष्य लेने अथवा पत्र, अभिलेख अथवा प्रलेख मांगने की शक्ति

(1) यदि विशेषाधिकार समिति अपने कर्त्तव्य-पालन के लिये व्यक्तियों की उपस्थिति अथवा पत्र अथवा अभिलेख प्रस्तुत कराना आवश्यक समझे तो उसे ऐसा मार्ग अपनाने की शक्ति होगी : परन्तु यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या समिति के प्रयोजनों के लिये किसी व्यक्ति का साक्ष्य या किसी प्रलेख का प्रस्तुत किया जाना संगत है तो उस प्रश्न का निर्देश सभापति को किया जायेगा जिसका निर्णय अंतिम होगा : परन्तु यह और भी कि सरकार किसी प्रलेख को प्रस्तुत करने से इस आधार पर इन्कार कर सकेगी कि उसका प्रकट किया जाना राज्य की सुरक्षा या हित के प्रतिकूल होगा।

(2) इस नियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, महासचिव द्वारा हस्ताक्षरित आदेश के द्वारा किसी साक्षी को आमंत्रित किया जा सकेगा और वह ऐसे प्रलेख प्रस्तुत करेगा जो समिति के उपयोग के लिये अपेक्षित हों।

(3) यह समिति के स्वविवेक पर निर्भर होगा कि वह अपने सामने दिये गये किसी साक्ष्य को गुप्त या गोपनीय माने।

197.समिति की बैठकें

(1) विशेषाधिकार समिति को विशेषाधिकार का कोई प्रश्न सौंपे जाने के बाद, यथाशीघ्र, समिति समय-समय पर समवेत होगी और राज्य सभा द्वारा निश्चित समय के भीतर एक प्रतिवेदन दे देगी : परन्तु जहां राज्य सभा ने प्रतिवेदन के उपस्थापन के लिये कोई समय निश्चित न किया हो, प्रतिवेदन उस तिथि से, जब मामला समिति को सौंपा गया हो, एक महीने के भीतर उपस्थित किया जायेगा : परन्तु यह और भी कि राज्य सभा किसी भी समय, प्रस्ताव किये जाने पर, निदेश दे सकेगी कि समिति द्वारा प्रतिवेदन के उपस्थापन के लिए समय प्रस्ताव में उल्लिखित तिथि तक बढ़ा दिया जाये।

(2) प्रतिवेदन प्रारंभिक हो सकते हैं अथवा अन्तिम।

(3) प्रतिवेदन पर समिति की ओर से समिति का अध्यक्ष हस्ताक्षर करेगा : परन्तु उस अवस्था में जब समिति का अध्यक्ष अनुपस्थित हो अथवा वह तत्काल न मिल सकता हो तो समिति की ओर से प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर करने के लिए समिति किसी अन्य सदस्य को चुनेगी।

198. प्रतिवेदन का उपस्थापन

विशेषाधिकार समिति का प्रतिवेदन राज्य सभा में समिति के अध्यक्ष द्वारा या उसकी अनुपस्थिति में समिति के किसी सदस्य द्वारा उपस्थित किया जाएगा।

199. प्रतिवेदन पर विचार करने का प्रस्ताव

प्रतिवेदन के उपस्थापन के बाद, यथाशीघ्र, समिति के अध्यक्ष या समिति के किसी सदस्य के नाम से इस आशय का एक प्रस्ताव रखा जायेगा कि प्रतिवेदन पर विचार किया जाये।

200. प्रतिवेदन पर विचार करने के प्रस्ताव में संशोधन

कोई सदस्य उपर्युक्त नियम 199 में निर्दिष्ट प्रतिवेदन पर विचार किए जाने के प्रस्ताव में संशोधन करने की सूचना उस रूप में दे सकेगा जैसे कि सभापति उपयुक्त समझे: परन्तु कोई ऐसा संशोधन उपस्थित किया जा सकेगा कि प्रश्न या तो बिना परिसीमा के या किसी विशेष विषय को निर्दिष्ट कर के समिति को पुन: सौंपा जाए।

201. प्रतिवेदन पर विचार के बाद प्रस्ताव

प्रतिवेदन पर विचार किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने के बाद, यथास्थिति, सभापति, समिति का कोई सदस्य या कोई अन्य सदस्य प्रस्ताव कर सकेगा कि राज्य सभा प्रतिवेदन में अन्तर्विष्ट सिफारिशों को स्वीकार करती है या अस्वीकार करती है या संशोधनों के साथ स्वीकार करती है।

202. प्रक्रिया का विनियमन

सभापति, समिति में राज्य सभा में विशेषाधिकार के प्रश्न पर विचार से संबंधित सभी विषयों के बारे में प्रक्रिया के विनियमन के लिए ऐसे निदेश दे सकेगा जिन्हें वह आवश्यक समझे ।

203. विशेषाधिकार के किसी प्रश्न को समिति को सौंपने की सभापति की शक्ति

इन नियमों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, सभापति, विशेषाधिकार के किसी प्रश्न की जांच, छानबीन या उस पर प्रतिवेदन के लिए विशेषाधिकार समिति को सौंप सकेगा।