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Rajya Sabha
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स्थानों का त्यागा जाना, अनुपस्थिति की अनुमति तथा स्थानों का रिक्त होना

213. राज्य सभा के स्थानों का त्यागा जाना

(1) राज्य सभा में अपने स्थान का त्याग करने का इच्छुक सदस्य सभा में अपने स्थान का त्याग करने के आशय की सूचना अपने हस्ताक्षर सहित लिखित रूप में सभापति को संबोधित करेगा।

(2) यदि कोई सदस्य सभापति को व्यक्तिगत रूप से अपना त्यागपत्र देता है और उसे सूचित करता है कि त्यागपत्र स्वैच्छिक और वास्तविक है और सभापति को इस के विपरीत कोई सूचना या ज्ञान नहीं है तो सभापति तुरन्त त्यागपत्र स्वीकार कर सकेगा।

(3) यदि सभापति को डाक द्वारा या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से त्यागपत्र प्राप्त होता है तो सभापति अपने समाधान के लिये कि त्यागपत्र स्वैच्छिक और वास्तविक है ऐसी जांच कर सकेगा जैसी कि वह उचित समझे। यदि सभापति द्वारा स्वयं या राज्य सभा सचिवालय या अन्य किसी अभिकरण के माध्यम से जिसे वह उचित समझे, संक्षिप्त जांच किये जाने के पश्चात् यह समाधान हो जाता है कि त्यागपत्र स्वैच्छिक या वास्तविक नहीं है तो वह त्यागपत्र स्वीकार नहीं करेगा।

(4) सदस्य अपना त्यागपत्र सभापति द्वारा स्वीकृत किये जाने से पूर्व किसी समय वापस ले सकेगा।

(5) सभापति सदस्य के त्यागपत्र को स्वीकार करने के पश्चात् यथाशीघ्र, सभा को सूचना देगा कि सदस्य ने सभा में अपना स्थान त्याग दिया है और उसने त्यागपत्र स्वीकार कर लिया है। स्पष्टीकरण - जब राज्य सभा सत्र में न हो तो सभापति राज्य सभा के पुन: समवेत होने के तुरन्त बाद सभा को इसकी सूचना देगा।

(6) सभापति द्वारा सदस्य के त्यागपत्र को स्वीकार किये जाने के पश्चात् महासचिव यथाशीघ्र, यह जानकारी संसदीय समाचार और राजपत्र में प्रकाशित करायेगा और अधिसूचना की एक प्रति निर्वाचन आयोग को इस प्रकार रिक्त हुए स्थान की पूर्ति हेतु कार्यवाही करने के लिए भेजेगा : परन्तु जहां त्यागपत्र भविष्य में किसी तारीख से लागू होना है, यह सूचना जिस तारीख से त्यागपत्र लागू होना है उस तारीख से पूर्व संसदीय समाचार और राजपत्र में प्रकाशित नहीं की जायेगी।

214. राज्य सभा की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति

 (1) जो सदस्य संविधान के अनुच्छेद 101 के खण्ड (4) के अधीन राज्य सभा की बैठकों से अनुपस्थित रहने की उसकी अनुज्ञा प्राप्त करना चाहे वह उस कालावधि को बताते हुए जिसके लिये वह राज्य सभा की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुज्ञा चाहता हो, सभापति को लिखित रूप में एक आवेदन पत्र देगा।

 (2) इस नियम के उपनियम (1) के अधीन आवेदन पत्र प्राप्त होने के बाद सभापति, यथाशीघ्र, उस आवेदन पत्र को राज्य सभा के समक्ष पढ़कर सुनायेगा और पूछेगा: "क्या राज्य सभा अमुक-अमुक सदस्य को अमुक-अमुक कालावधि के लिये राज्य सभा की समस्त बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुज्ञा देना चाहती है ? " यदि कोई सदस्य असहमति प्रकट न करे तो सभापति कहेगा: "अनुपस्थित रहने की अनुज्ञा दी जाती है।" किन्तु यदि कोई असहमति-सूचक स्वर सुनाई दे तो सभापति राज्य सभा का अभिप्राय मालूम करेगा और तब राज्य सभा के निश्चय की घोषणा करेगा।

 (3) इस नियम के अधीन राज्य सभा के समक्ष किसी प्रश्न पर कोई चर्चा नहीं होगी।

 (4) राज्य सभा द्वारा निर्णय व्यक्त किये जाने के बाद महासचिव यथाशीघ्र उसे सदस्य को सूचित करेगा।

215. राज्य सभा में स्थानों का रिक्त किया जाना

 (1) संविधान के अनुच्छेद 101 के खण्ड (4) के अधीन किसी सदस्य का स्थान राज्य सभा के नेता के या किसी ऐसे अन्य सदस्य के प्रस्ताव पर, जिसे वह इस सम्बन्ध में अपने कृत्यों का प्रत्यायोजन करे, रिक्त घोषित किया जायेगा।

 (2) यदि इस नियम के उपनियम (1) में उल्लिखित प्रस्ताव स्वीकृत हो जाये तो महासचिव यह जानकारी राजपत्र में प्रकाशित करायेगा और अधिसूचना की एक प्रति निर्वाचन आयोग को इस प्रकार रिक्त हुए स्थान की पूर्ति के हेतु कार्यवाही करने के लिए भेजेगा।